उफ़्फ़ ! ये बारिश भी ना
उफ़्फ़ ! ये बारिश भी ना
कहीं भी गिर जाती है
बिना कहे -
बिना समझे,
ना तो पगली का कोई ईमान है
ना ही कोई मज़हब
फिर भी बरस पड़ती है
बिना देखे
बिना समझे
अब देखो ना !
किस क़दर शर्मा जी के
टीन की छत से गिरते हुए
टेलीफोन के तार में लिपटकर
मौलवी जी के आँगन में जा रही है
उफ़्फ़ ! ये बारिश भी ना .....
(C)सर्वाधिकार
कहीं भी गिर जाती है
बिना कहे -
बिना समझे,
ना तो पगली का कोई ईमान है
ना ही कोई मज़हब
फिर भी बरस पड़ती है
बिना देखे
बिना समझे
अब देखो ना !
किस क़दर शर्मा जी के
टीन की छत से गिरते हुए
टेलीफोन के तार में लिपटकर
मौलवी जी के आँगन में जा रही है
उफ़्फ़ ! ये बारिश भी ना .....
(C)सर्वाधिकार
Post a Comment