आखिर कौन कहता है ?....... बादलों से बरसो हवाओ से बहको पत्थरों से पड़े रहो पहाड़ों से खड़े रहो आखिर कौन कहता है ?....... आसमान से मौन रहो जंगल से यौवन रहो सितारों तुम चमकते रहो लहरों तुम मचलते रहो आखिर कौन कहता है ?....... नदियों को बहने के लिये परिन्दों को उड़ने के लिये रंगो को फैलने के लिये मछलियों को तैरने के लिये आखिर कौन कहता है ?....... फसलों को पकने के लिये फूलो को खिलने के लिये बीज को अंकुरित होने के लिये रात को सिर्फ सोने के लिये आखिर कौन कहता है ?.......
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