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अबे ओ ! मजदूर

अबे ओ ! मजदूर 
आखिर यूँ ही अपनी कब तक मरवाएगा |
हवाओं में उड़ने वालों से 
अपनी ऐसी की तैसी कब तक करवाएगा ||
पूंजीवादी मादा मच्छरों से 
आखिर अपना खून कब तक चुसवाएगा ||
उनकी आसमान छूती हवेलियों की बुनियाद 
अपने ऊपर कब तक रखवाएगा ||
अबे ओ ! मजदूर अब सुन भी ले 
आखिर यूँ ही अपनी कब तक मरवाएगा ||
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