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हम-तुम और एक सर्दी की रात

हम-तुम और एक सर्दी की रात 
खुला आसमां टपकती ओंस
एक जलते हुवे चूल्हे में
आग की मरती हुई लपटें 
धुंद से सनी हुई फ़िज़ा
पर अच्छा लगता था यार 
चूल्हे के समीप
तेरा सर मेरे कंधे पर
मेरी बाहें तेरी कमर से लिपटी
उस रात का पता ही नहीं चला
जो अब यादो के अवशेषो मै है .

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