दुल्हन (सर्वाधिकार सुरक्षित)
सुहाग रात की सेज पर बैठी
नवेली दुल्हन
बुन रही थी अपने सपनों को
इंतजार कर रही थी
अपने ख्वाबों का
अपने भविष्य का
अपने आने वाली खुशियों का
वह सब कुछ छोड़कर
आई थी एक अजनबी के पास
उम्मीदों की गठरी लेकर
अब वह अपना सब कुछ
सौंप देगी उसे-
जिसे वो सबसे
बचाते-बचाते आ रही थी
यूं ही सपने देख रही थी वो-
कि अचानक दरवाजे पर दस्तक
के साथ एक खौंपनाक चेहरा
आते ही रौंद जाता है
उस नवेली के सपनो को
सजाये फूलों के साथ

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