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पगली.......

तुम्हारे अन्दर की घुटन को
मै जानता हूँ भली भाँति
पर मुस्कुराकर पर्दा डालने का
सबूर अभी तुझमें कही बांकी है
तू तो प्यार भी ना जता सकी थी
कभी खुल कर पगली !
वो तो मेरा ही दिल था
जो जान जाता
था तेरे बोलते ही -
"मुझे न तुम पर बहुत गुस्सा आ रहा है"

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