कुछ तो- बात होगी मुझमें नही तो- ना चाहते हुये भी तेरी पगली आँखें मुझे देखकर- इतना क्यों ? इतरा जाती है ख़ुद तो- कहती हो कि- "देख लेंगे सब लोग" और- अपनी बारी आने पर दुनिया ही भूल जाती हो कुछ तो- बात होगी न मुझमें
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