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मेरा दिल....

कभी हँसता है ,कभी रोता है, कभी शरारत करता है,
ये जो मेरा दिल है ना-
इसके भीतर एक छोटा सा  बच्चा रहता है....
कभी गिरता  है ,कभी उठता  है
मिटटी के टीले पर ना जाने क्या करता है.
ना दर्द का एहसास है ,ना मेहनत कि थकान
ना जाने दिनभर ये क्या क्या सहता है?
ये जो मेरा दिल है ना-
इसके भीतर एक छोटा सा  बच्चा रहता है.....
कभी बंद आंखों में, कभी बंद कानो में
ना जाने कोन सा नियम खोजता है
फिर सूखे पेड़ को देर तक निहारना 
और ना जाने 
उसकी आकृतियों से चुप रहकर क्या कहता है ?
ये जो मेरा दिल है ना-
इसके भीतर एक छोटा सा  बच्चा रहता है.....
कौन सी दुनिया  है कोन सा आकाश
खबर क्या?
जितना दूर दोड़ सकता हूं वही जहाँ है
हाथ उठाते ही
ना जाने  मंद बयार में कहा बहता है ?
ये जो मेरा दिल है ना-
इसके भीतर एक छोटा सा  बच्चा रहता है.....

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