बरसात और हम (सर्वाधिकार सुरक्षित)
आप घबराई सी हो
मै आपके कदमों में बैठ के
आपकी चप्पले ठीक कर रहा हूँ
अब आप घबरा रही हो
बरसात तेज है ...
और छोटी सी नदी अब उफान मारेगी
हमें जल्दी पार करना होगा
मै आपको गोद में उठा रहा हूँ
और पार कर रहा हूँ नदी को
आप मेरे चेहरे को देखे हो
शायद तुम फिर घबरा रही हो
ना जाने मै तुमसे क्या जो कह दूं ?
अब बारिश बड़ गयी है
तुम बहुत भीग गयी हो
मै अपना जैकेट तुम्हे ओड़ा रहा हूँ
अब तुम फिर घबरा रही हो
मै क्या जो कर रहा हूँ ?
अब आप बारिश से बचने के लिये
चली गयी हो .........
उस विशालकाय पेड़ के नीचे
और हाथों से निचोड़ रही हो
अपने कपड़ों को ...
तुम फिर भी घबरा रही हो
पीछे से मै क्या जो शरारत कर दूं ?
मै अब तुम्हारे करीब हूँ
बहुत करीब
मेरी सांसों को तुम महसूस कर रही हो
मै तुम्हारे चेहरे से बालों को हटा रहा हूँ
अचानक से मेरा छूना
न जाने आपको क्या कर गया
आपके हाथ मेरे कंधों पर है
मेरे हाथ आपकी कमर पर
मेरे होंठ बड़ रहे है आपकी तरफ
आप पसीने से तरबतर सिमट रही हो
और घबरा रही हो
न जाने अब मै क्या जो कर रहा हूँ ?
अब तुम्हारी आंखे खुल गयी है
तुम मुस्कुराकर खुद को ही कह रही हो
"पागल".......!
अब आपकी नजर मुझे ढूंड रही है
अरे ये क्या ? मै तो भीग रहा हूँ
अभी तक गांव के बच्चों के साथ ...
"पागल ये नहीं सुधरेंगे" कहकर
अब तुम अपना दुपट्टा निचोड़ कर
आ रही हो मेरे पास .......
मेरा हाथ पकड़े ले जा रही हो
पेड़ के पास बहुत करीब होके
माथा पोछ रही हो अपने दुपट्टे से
मै अब महसूस कर रहा हूँ
आपकी सांसों की गर्मी को
आपका छूना बड़ा अजीब है
बहुत असहनीय...
अब मै घबरा रहा हूँ
न जाने तुम अब क्या जो कर दोगी ।... भास्कर आनन्द तिवारी

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